हिमा दास का जीवन परिचय – Hima Das Biography In Hindi

इस पोस्ट में हम हिमा दास का जीवन परिचय ( Hima Das Biography In Hindi ) पढ़ेंगे| हिमा दास कौन है? हिमा दास कहाँ की रहने वाली हैं? हिमा दास के कोच कौन है? इत्यादि पूरी जानकारी इस पोस्ट में शेयर करेंगे| उम्मीद है आपको हमारी ये पोस्ट काफी पसंद आएगी|

हिमा दास कौन है ( Hima Das Kaun Hai )

हिमा दास एक भारतीय रेसर हैं। हिमा दास 19 साल की उम्र, महीने भर में 5 गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी है। यूरोप के अलग-अलग शहरों में अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में किसी भी ग्लोबल ट्राइन्ग इवेंट में गोल्ड का तमगा जकड़ने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं।

फेमिना और वोल्क जैसी मैगज़ीन के कवर पर चमकने वाली लड़की वो मैगज़ीन जिन तक पहुंचने के लिए सुन्दरता के मानक तय है हिमा ने उन्हें चुनौती दी और अपने लक्ष्य को हासिल किया सिर्फ और सिर्फ अपने हुनर के दम पर। हिमा दास का घर देश की राजधानी दिल्ली से 2000 किलोमीटर दूर है।

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हिमा दास का जन्म ( Hima Das Ka Janm )

असम के नागावँ जिले के ढिंग गांव में 9 जनवरी सन 2000 को हिमा का जन्म हुआ। हिमा दास के पिता का नाम ( Hima Das Ke Pita Ka Nam ) रोंजीत दास और माता का नाम ( Mata Ka Nam ) जोमली है।

hima das picture
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हिमा 6 भाई बहनों में सबसे छोटी है। कुल 17 लोगो का परिवार है। सभी धान की खेती करते हैं। हेमा ने भी अपने जीवन का हिस्सा खेतों में बुवाई और निराई करते हुए बताया है।

हिमा दास का उपनाम ( Hima Das Ka Upnaam )

हिमा दास ( Hima Das ) को ढिंग एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता है। क्योंकि ये असम राज्य के ढिंग गावँ की रहने वाली है। हिमा दास को गोल्डन गर्ल के नाम से भी जाना जाता है।

हिमा दास ने कैसे की अपने करियर की शुरुआत

बचपन में हिमा दास ( Hima Das ) का इरादा फुटबॉलर बनने का था वह स्कूल में लड़कों के साथ में फुटबॉल भी खेलते थे मैदान में उनकी फुर्तीदेखकर एक टीचर ने एथलेटिक्स में करियर बनाने की सलाह दी थी। हेमा ने सलाह मान भी ली। रेश चुनी और सबसे तेज होने की चाहत पाल ली।

लोकल लेवल पर कंपटीशन में भाग लेना शुरू कर दिया। मेडल भी लाने लगी। अब बारी थी स्टेट चैंपियनशिप की। हिमा ने गोवाहाटी में स्टेट चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने कांस्य पदक जीता। फिर उन्हें जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के लिए भेजा गया।

मगर कमजोर ट्रेनिंग और अनुभव ना होने के कारण मेडल नहीं ला सकी। 100 मीटर की रेश के फाइनल तक जरूर पहुंची। हेमा यहां काफी निराश हो गई। लोग हिमा का करियर खत्म मानने लगे लेकिन उनके कोच ( Coach ) निपुण दास ने ऐसा नहीं होने दिया।

उन्होंने हेमा के घर वालों को मनाया की वे हेमा को ट्रेनिंग के लिए गोवाहाटी जाने की अनुमति दें। पिता तो इस बात से ही खुश थे कि उनकी बेटी को कम से कम 3 वक्त का भोजन मिल सकेगा। लेकिन ये एक नए संघर्ष की शुरुआत थी।

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हेमा को रोज गांव से बस पकड़नी होती थी 140 किलोमीटर दूर गोवाहाटी जाने के लिए। फिर वापस रात में लौटना होता था रात के 11 बज जाते थे। घरवालों की चिंता बढ़ने लगी और फिर उनके कोच ने साथ दिया। उन्होंने एक लोकल डॉक्टर की मदद से हेमा के रहने का इंतजाम करवाया। इस तरह हेमा के लिए राह थोड़ी आसान हो गई थी।

जूतों का किस्सा


हेमा की इस ट्रेनिंग के दौरान एक किस्सा उनके जूतों का भी है। किसान परिवार की बेटी को ट्रेनिंग के लिए अच्छे जूतों की दरकार थी। हेमा घर की हालत जानती थी। इसलिए कभी कह नही पाई। मगर पिता सब जानते थे वे गुवाहाटी गए और उन्होंने हेमा के लिए 1200 रुपये के जूते खरीदे। ये जूता एडिडास कंपनी का था। सितम्बर 2018 में इसी कंपनी ने हेमा को अपना अम्बेसडर बनाया।

गेम्स के लिए बोर्ड की परीक्षा छोड़ी


2018 में आस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हेमा को अपनी बोर्ड परीक्षा भी छोड़नी पड़ी थी। घरवालों ने भी उनका साथ दिया और कहा कि खेलने का ऐसा मौका चार साल बाद ही मिलेगा परन्तु बोर्ड परीक्षा अगले साल भी हो सकती है। और यही हुआ 2019 में हेमा ने बोर्ड की परीक्षा दी और फर्स्ट डिवीज़न से 12वीं पास की।

हिमा दास द्वारा जीते गए मेडल ( Hima Das Medal )

बोर्ड एग्जाम से पहले हेमा एक इतिहास भी रच चुकी थी। जुलाई 2018 में फिनलैंड के तामपुर में वर्ल्ड अंडर 20 चेम्पियनशिप खेली जा रही थी। यहां 400 मीटर की रेस में हेमा ने 51.46 सेकंड का समय लेकर गोल्ड जीता।

यह किसी भी वर्ल्ड लेवल की चेम्पियनशिप में इंडिया का पहला गोल्ड था। पहले 300 मीटर तक हेमा काफी पीछे चल रही थी। अंतिम 100 मीटर में उन्होंने सबको पीछे छोड़ दिया। यही उनकी ताकत भी है।

Hima Das Gold Medal 2019

जुलाई 2019 भी हेमा के नाम रहा 20 दिनों के अंतराल में एक के बाद एक हेमा ने 5 गोल्ड मेडल अपने नाम किये। Poznan Athletics Grand Prix 2019 में पोलैंड में आयोजित 200 मीटर की रेस में हिमा दास ने गोल्ड मेडल जीता।


Kutno एथेलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में हिमा दास ने 200 मीटर में गोल्ड मेडल जीता। कल्दनो मेमोरियल एथेलेटिक्स मीट 2019 में हिमा दास ने गोल्ड मेडल जीता था। यह चेक गणराज्य में आयोजित किया गया था। ताबोर एथेलेटिक्स 2019 में हिमा दास ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
चेक गणराज्य में आयोजित नोवे मेस्ट्रो नाड मटुजी ग्रैंड पिक्स में 400 मीटर की रेस में हिमा दास ( Hima Das Gold ) ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

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हेमा की कड़ी मेहनत ( Hima Das Struggle )

इसके बाद भी हेमा को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 5 गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी उन्हें सितम्बर में होने वाली वर्ल्ड चेम्पियनशिप का टिकट नहीं मिला। 400 मीटर की स्पर्धा में 51.80 सेकंड क्वालीफाई मार्क था हेमा 52.9 पर अटक गई।

200 मीटर की कैटेगरी में क्वालीफाई करने के लिए 23.02 सेकंड में रेस पूरी करनी थी हेमा ये भी नही कर सकी। जिन प्रतियोगिताओं में हेमा ने सोने का तमगा हासिल किया वे E और F कैटेगरी में आते हैं। जिन्हें इंटरनेशनल लेवल पर सबसे निचले स्तर पर रखा जाता है। ऐसे में हेमा को अभी और बहुत मेहनत करनी थी।

पुरुस्कार ( Hima Das Puraskar )

हिमा दास को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिमा दास को असम राज्य का खेल राजदूत नियुक्त किया गया। यूनिसेफ ने हिमा दास को भारत का पहला युवा राजदूत बनाया।

इस प्रकार से हिमा दास ने बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हुए विश्व मे अपना कीर्तिमान स्थापित किया। अगर मन मे दृढ़ इच्छा हो कुछ करने की तो रास्ते मे आने वाली बाधाएं आपको रोक नहीं सकती।

हिमा दास के जीवन से हमें भी शिक्षा लेनी चाहिए। इतनी मुसीबतें आने के बावजूद हिमा दास ने हार नहीं मानी। आशा करता हूँ दोस्तों आपको हमारी ये पोस्ट हिमा दास का जीवन परिचय ( Hima Das Ka Jivan Parichay ) काफी पसंद आई होगी।

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